जेल में डीआईजी को देखते ही सलमान को याद आए अपने दादा, DIG से कह दी ये बात

जोधपुर सेंट्रल जेल इस समय सुर्खियों में और वजह हैं सलमान खान, जो कि काले हिरण के शिकार के मामले में यहां बंद है। ऐसे में आजकल सबकी नजरें इस जेल की खबरों पर बनी हुई हैं। सोशल मीडिया में सलमान के इस जेल के अंदर जाने से लेकर यहां के पुलिस वालों से बातचीत करते हुए उनकी कुछ तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं। जेल के भीतर से आई एक तस्वीर में सलमान पुलिसवालों के सामने आराम से पैर फैला कर कुर्सी पर बैठे नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में सलमान का चिरपरिचित दबंग वाला अंदाज ही नजर रहा है.. ऐसे में लोग कयास लगा रहे हैं कि आखिर सलमान ने क्या बातचीत की होगी इस दौरान, तो चलिए आपको बताते हैं कि सलमान ने जेल में पुलिस वालों से मिलकर क्या कहा।

जेल में दिखा सलमान का दबंग अंदाज

वैसे आपको बता दें कि सलमान पहली बार इस जेल में नहीं आए हैं बल्कि इससे पहले 1998, 2006 और 2007 में वे  कुल18 दिन इसी जेल में गुजार चुके  हैं। ऐसे में वहां के माहौल से परिचित हैं। पिछली बार जब सलमान यहां आए थे तो उन्हें जेल की व्यवस्थाएं कुछ खास रास नहीं आई थी और यहां से बाहर निकलते ही सलमान ने इसकी शिकायत करते हुए अपने पैसों से जेल में विशेष इंतजाम करने की बात कही थी। हालांकि सलमान ने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया है.. और अब एक बार इसी जेल में सलमान सजा के लिए आए हैं। ऐसे में जेल में सलमान के बीते पलों के बारे में कई सारी खबरें मीडिया में आ रही हैं। वहीं जेल में यहां के डीआईजी से उनकी मुलाकात के भी खूब चर्चे हो रहे हैं क्योंकि जैसा कि  बताया जा रहा है सलमान ने जैसे ही डीआईजी का परिचय पाया उन्हे अपने दादाजी की याद आ गई।

DIG से बोले मेरे दादा भी थे डीआईजी

दरअसल कोर्ट से पांच साल की सजा सुनाए जाने के बाद जब सलमान खान जोधपुर की सेंट्रल जेल में गए तो वहां उनकी मुलाक़ात डीआईजी जेल विक्रम सिंह से हुई। मीडिया में आई खबरों की माने तो सलमान को जैसे ही डीआईजी जेल ने अपना परिचय दिया, सलमान ने भी झट से कहा कि मेरे दादाजी भी डीआईजी थे। आपको बता दें कि सलमान खान के दादा अब्दुल राशिद खान 1857 में इंदौर के होलकर राम पुलिस में डीआईजी थे। इस बात का जिक्र जासिम खान की किताब ‘बीइंग सलमान’ में भी है।

महाराजा यशवंत राव होलकर से थें खास सम्बंध

इस किताब में बताया गया है कि अब्दुल राशिद खान तत्कालीन महाराजा यशवंत राव होलकर के खास थें और महाराजा ने उन्हें ‘दिलेर जंग’ की उपाधि से नवाजा था। सलमान के दादा अब्दुल राशिद खान के संबंध होलकर राज परिवार से तब से रहे हैं, जब सलमान खान के पूर्वज अफगानिस्तान से इंदौर आए थे।वैसे सलमान के दादा उस वक्त डीआईजी के पद पर रहते हुए 100 रुपये प्रति माह पगार पाते थे और रिटायरमेंट के वक्त उन्हें 325 रुपये महीना मिलते थे। इसके साथ ही सलमान के दादा के बारे में ये  किस्सा यह भी काफी मशहूर है कि 19वीं सदी के शुरुआती दशकों में अब्दुल राशिद खान के हाथों इंदौर का एक खजाना लग गया था। बताया जाता है कि उन्होंने इंदौर के ‘बड़वाली चौकी’ में एक इमारत खरीदी थी और जब उसे तोड़ा जा रहा था तो उसमें एक खजाना मिला था।

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