केवल शादीशुदा महिलाएं क्यों पहनती हैं बिछिया, वजह जानकर दांतो तले ऊंगली दबा लेंगे

शादी के बाद कुछ चीजें बदल जाती है। खासकर महिलाओं के रहन सहन में काफी बदलाव देखने को मिलता है। महिलाएं सोलह सिंगार की हुई नजर आती हैं। इन सबके बीच आपने देखा होगा कि महिलाएं पैरो में बिछियां पहनती है। लेकिन ज्यादातर महिलाएं ये नहीं जानती हैं कि आखिर बिछियां क्यों पहनी जाती है? ये सिर्फ गहना नहीं होता है, बल्कि इससे आपको काफी फायदा होता है। इतना ही नहीं, इसका चलन तो प्राचीनकाल से ही है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर क्योंं पहनी जाती है बिछियां?

बिछियां को सुहागन की निशानी मानी जाती है। लेकिन आजकल देखा जाता है कि महिलाएं बिछियां नहीं पहनती है। मतलब शहरी क्षेत्र में इसे अपने फैशन के खिलाफ माना जाता है, तो वहीं गांवों में इसका चलन आज भी बहुत है। शास्त्रों में बिछियां पहनने के अनगिनत फायदे गिनाएं है, तो वहीं विज्ञान में भी इसके खूब फायदे देखने को मिलते हैं। पैर के अंगूठे की तरफ से दूसरी अंगुली में एक विशेष नस होती है, जोकि महिलाओं के गर्भाशय से जुड़ी होती है।

माना जाता है कि पैरो की जो बीच की ऊंगली होती है, वो सीधे गर्भाशय से जुड़ी होती हैं। ऐसे में जो महिलाएं मां बनना चाहती हैं, उन्हें बिछियां जरूर पहनना चाहिए, क्योंकि बिछियां पहनने से गर्भधारण की क्षमता बढ़ती है। साथ ही इससे गर्भपात का भी खतरा नहीं होता है। इतना ही नहीं, पैरो की ऊंगलियों में पहनने की वजह से ये आपकी बॉडी को भरपूर रक्षा भी करती है। बिछियां पहनने की वजह से आपको गर्भाशय से जुड़ी कोई भी बिमारी नहीं होती है।

बिछिया के दबाव से रक्तचाप स्थिर और नियंत्रण में रहता है। इसके अलावा सही तरीके से ब्लड का संचार होने के कारण महिलाओं को तनाव से मुक्ति मिलती है। वैज्ञानिक दृष्टि से देखे तो बिछियां पहनने से महिलाएं खुद को एकदम फ्रेश महसूस करती हैं। चूंकि बिछियां चांदी की होती है और चांदी बॉडी के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होती है। यही वजह है कि शादी के बाद महिलाएं बिछियां पहनती है।

बिछिया को आभूषण के तौर पर नहीं पहना जाता है। और न ही इसकी शुरूआत अभी हुई है। बल्कि इसकी शुरूआत तो प्राचीनकाल से ही है। बता दें कि जब सीता माता को रावण अगवा करके ले जा रहा था, तो सीता माता ने अपने पैरो की बिछिया को उतार के फेंक दी थी, ताकि भगवान राम को सीता माता का पता चल सके। ऐसे में यही पता चलता है कि बिछिया का चलन अभी से नहीं बल्कि प्राचीनकाल से ही है। बिछिया तो देवी माता भी धारण करती हैं।

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