यह हजारों साल पुराने मंदिर माने जाते हैं अखंड ज्योति का प्रतीक, आज तक जलती है अग्नि

हमारे भारतवर्ष में ऐसे बहुत से प्रसिद्ध मंदिर है जो अपनी खास विशेषता और चमत्कारों की वजह से जाने जाते हैं भारत में 2 किलोमीटर के बाद आपको कोई घर दिखाई दे या ना दे परंतु आपको मंदिर देखने को अवश्य मिल जाएगा, भारतवर्ष के अंदर लगभग हजारों लाखों की संख्या में मंदिर है और इन मंदिरों में दूर-दूर से भक्त दर्शन करने के लिए भारी संख्या में आते हैं भक्तों के मन में इन मंदिरों के प्रति बहुत आस्था होती है इन्हीं मंदिरों में से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जिन मंदिरों में हजारों सालों से अखंड ज्योति जल रही है अभी तक उनकी अग्नि बुझी नहीं है वैज्ञानिक भी इन चमत्कारिक मंदिरों के आगे हार मान चुके है वह भी इस बात की वजह नहीं जान पाए है कि इस अखंड ज्योति के पीछे का रहस्य क्या है आज हम आपको इस लेख के माध्यम से भारत के ऐसे ही चमत्कारिक मंदिरों के विषय में जानकारी देने जा रहे हैं जिनमें कई सालों से अखंड ज्योति जल रही है।

आइए जानते हैं इन मंदिरों के बारे में

कामाख्या मंदिर

एक ऐसा मंदिर असम में है जो तंत्र विद्या के लिए काफी प्रसिद्ध है इस मंदिर का नाम “कामाख्या मंदिर” है इस मंदिर के अंदर प्राकृतिक रूप से एक दिव्य ज्योति जलती रहती है इस मंदिर में ज्योति को ही देवी का स्वरूप माना जाता है इस मंदिर में दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन करने आते हैं और इस ज्योति के भी दर्शन करते हैं।

हरसिद्धि माता मंदिर

हरसिद्धि माता मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है इस मंदिर में 30 अखंड दीप जलते हैं इसके बारे में ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर में यह दीप पिछले 2000 सालों से जल रहे हैं इसके बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर में यह दीप राजा विक्रमादित्य ने जलाया था और रोज इन दीपकों में तेल भी भरा जाता था यह दीप इसी तरह से हमेशा जलते हैं।

ज्वाला देवी मंदिर

हिमाचल प्रदेश का “ज्वाला देवी” मंदिर सबसे अधिक चमत्कारिक है यह दिव्य शक्ति से अग्नि प्रज्वलित करने के मामले में प्रसिद्ध है ऐसा बताया जाता है कि इस मंदिर में जल रही ज्वाला को अकबर भी बुझाने में असफल रहा था इस मंदिर के चमत्कार के आगे अकबर ने भी अपने घुटने टेक दिए थे चाहे सर्दी हो या गर्मी हो, धूप हो या बरसात का मौसम हो, इस मंदिर में यह ज्वाला इसी तरह से लगातार चलती रहती है।

श्री राधा रमण मंदिर

वृंदावन में स्थित श्री राधा रमण मंदिर में सदियों से पवित्र ज्योति जल रही है इस बारे में ऐसा बताया जाता है कि यह ज्योति तमिलनाडु के श्रीरंगपट्ट्नम में बने श्रीरंगम मंदिर से वृंदावन लाया गया था इसी ज्योति के द्वारा मंदिर के सभी दीपक जलाए जाते हैं और भगवान् को भोग लगाने के लिए प्रसाद भी तैयार किया जाता है।

ममलेश्‍वर महादेव

पांडवों द्वारा स्थापित हिमाचल के ममलेश्‍वर महादेव में 5 शिवलिंगों की पूजा की जाती है इस मंदिर में जल रही धुनि को अग्निकुंड भी कहा जाता है इसके बारे में ऐसा बताया जाता है कि 5000 साल पहले पांडवों ने इसी जगह पर यह अग्निकुंड जलाई थी और इस जगह पर पांडवों द्वारा जलाई गई अग्नि को आज भी उसी प्रकार प्रज्वलित रखा जाता है।

त्रिर्युगी नारायण मंदिर

देवभूमि कहे जाने वाले उत्तराखंड की पावन धरती पर रुद्रप्रयाग में स्थित त्रिर्युगी नारायण मंदिर में हजारों सालों से एक अग्निकुंड जल रही है इस विषय में ऐसा माना जाता है कि इसी अग्निकुंड में चारों और भगवान शिव और माता पार्वती ने सात फेरे लिए थे इस मंदिर में आज भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और इस पवित्र अग्नि कुंड के दर्शन करते हैं और इस अग्निकुंड की राख को अपने साथ घर लेकर जाते हैं।

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