किसानों पर मेहरबान हुई मोदी सरकार, ‘देश के अन्नदाताओं पर हुई तौहफों की बरसात’

उपचुनाव में लगातार हार से बीजेपी ने अब सबक ले लिया है। जी हां, यूपी  उपचुनावों में बीजेपी का हारना खतरे की घंटी मानी जा रही है। लेकिन अब इस खतरे की घंटी को शांत कराने के लिए बीजेपी मास्टरस्ट्रोक खेलने जा रही है। इस मास्टरस्ट्रोक का लाभ सीधे सीधे अन्नदाता को मिलेगा। अन्नदाता खुश तो बीजेपी की सारी समस्याएं दूर हो जाएंगी। देश भऱ के किसानों का हड़ताल भी खत्म हो जाएगा, जिसकी वजह से 2019 में बीजेपी बड़ी जीत की तरफ बढ़ सकती है। चलिए जानते हैं कि हमारे इस रिपोर्ट में क्या खास है?

केंद्र की मोदी सरकार अब किसानों को बड़ा तौहफा देने जा रही है। ये उन किसानों को मिलेगा, जो गन्ने की खेती करते हैं। गन्ने की खेती करने वाले किसानों पर काफी बोझ है। यही वजह है कि अब सरकार बोझ खत्म करने की कवायद में जुटी हुई है। सिर्फ यूपी में ही किसानों पर चीनी मिलों का करीब 13 हजार करोड़ रूपए बक़ाया हो चुका है, ऐसे में सरकार गन्ना किसानों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है।

सरकार गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए उनका बकाया 20 हजार करोड़ के भुगतान करने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, सरकार ने चीनी निर्यात पर लगने वाले टैक्स को भी हटा दिया है। बता दें कि बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में  सरकार कई बड़े फैसले ले सकती है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी, ऐसे में बीजेपी के इस स्ट्रोक से विपक्ष पूरी तरह से बौखला सकता है, क्योंकि किसानों के सहारे विपक्ष अपनी रोटियां सेंकने में लगा हुआ था।

चीनी का बनेगा बफ़र स्टॉक

बुधवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला आ सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक,  कैबिनेट लगभग 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक बनाए जाने की योजना को मंज़ूरी दे सकती है, ऐसे में बफर स्टॉक बनाने में 1200 करोड़ रुपए लगने की संभावना, इससे किसानों को बहुत ही ज्यादा फायदा मिलने वाला है। इस स्टॉक का यह फायदा होगा कि किसान मिल से चीनी कभी भी निकाल सकते हैं, जिसके  लिए सरकार नये नये नियम बनाएगी।

इतना ही नहीं, देश में एथेनॉल की क्षमता बढ़ाने के लिए भी सरकार कोई फैसला ले सकती है, ऐसे में लगभग 4400 करोड़ रुपए के इस पैकेज के तहत एथेनॉल के उत्पादन के लिए गन्ना का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया जाएगा। सरकार इस फैसले से गन्ना किसानों की मुसीबतों को कम करना चाहती है तो वहीं दूसरी तरफ आगामी लोकसभा चुनाव में अपना वोट बैंक मजबूत रखना चाहती है।

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