देश की दुर्दशा के लिए जेएनयू के वीसी ने ठहराया नेहरु को ज़िम्मेदार, कह दी इतनी बड़ी बात

नई दिल्ली: इस समय भारत देश की हालत क्या हो गयी है, यह किसी से छुपा हुआ नहीं है। देश में इस समय कुछ लोग देश विरोधी कामों को बेख़ौफ़ होकर अंजाम दे रहे हैं। देश के बाहरी दुश्मनों से तो देश की रक्षा की जा सकती है, लेकिन देश के अंदर बैठे इन दुश्मनों से कैसे बचा जाए, यह एक बड़ा सवाल है। आज जाति-धर्म के नाम पर लोगों को एक-दूसरे से लड़वाया जा रहा है। लोगों के अंदर से मानवता धीरे-धीरे ख़त्म होती जा रही है।

देश की इसी दुर्दशा पर जेएनयू के वीसी जगदेश कुमार ने कुछ ऐसा कहा है, जिसके बारे में जानकार आप हैरान हो जाएँगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें जेएनयू कैंपस के अंदर सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज़ के एक कार्यक्रम के वीसी ने कहा कि देश इस समय जिन हालातों से गुज़र रहा है, उसके लिए कोई और नहीं बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरु ज़िम्मेदार हैं। इस बात को उन्होंने जनसंघ के संस्थापक डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का हवाला देते हुए कहा। जगदेश कुमार ने कहा कि आज़ादी के समय अगर नेहरु ने दूरदर्शिता दिखाई होती तो आज देश साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता जैसे मुद्दों में नहीं उलझा होता।

वीसी ने आगे कहा कि नेहरु ने उस समय जान बूझकर बड़े मुद्दों के सामने साम्प्रदायिकता का रोना रोया था, ताकि मुद्दों से लोगों का ध्यान हट सके। ज्ञात हो कि जेएनयू कैंपस में उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा जैसे विषयों पर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान पर आयोजित एक कार्यक्रम में जेएनयू के वीसी जगदेश कुमार ने इन बातों का ज़िक्र किया। वीसी ने कहा कि आज देश के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एक अहम मुद्दा बना हुआ है। भारत को हमेशा चीन और पाकिस्तान से ख़तरा रहता है। डोकलाम विवाद का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस घटना के बाद यह मुद्दा और गम्भीर हो गया है।

इस स्थिति में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय ज़्यादा गम्भीर हो गया है। वीसी ने कहा कि इसी बात का ध्यान रखते हुए बहुत जल्द ही जेएनयू कैंपस में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विषय के लिए एक विशेष केंद्र की शुरुआत की जाएगी। जून 1951 में दिए गए डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भाषण का हवाला देते हुए वीसी जगदेश कुमार ने कहा कि पंडित नेहरु ने साम्प्रदायिकता का रोना सिर्फ़ देश का बड़े मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए रोया था। उन्होंने कहा कि उस समय देश में ग़रीबी, भूखमरी, भ्रष्टाचार जैसी बड़ी समस्याएँ थी।

इन समस्याओं का समाधान नेहरु ने नहीं किया। इसी वजह से आज 70 सालों के बाद भी देश एक समावेशी, एकीकृत और मज़बूत भारत के लिए संघर्ष कर रहा है। आज भारत के भीतर और बाहर दोनो तरफ़ नक़ली ताक़तें राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने में लगी हुई हैं। ऐसा करके देश विरोधी ताक़तें भारत को एक मज़बूत, एकीकृत, और विकसित राष्ट्र की तरफ़ बढ़ने से रोकने का प्रयास कर रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें इसी साल मई महीने में जेएनयू अकादमिक परिषद ने राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके तहत इस्लामी आतंकवाद पर एक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अकादमिक परिषद के कई सदस्यों ने इस्लामी आतंकवाद पर पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को साम्प्रदायिकता को बढ़ावा देने वाला कहा था।

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