बड़ी खबर: एक साथ हो सकते हैं लोकसभा और 14 राज्यों में विधानसभा चुनाव, जानिये कैसा होगा समीकरण?

देश में एक देश एक चुनाव की बात ने फिर से जोर पकड़ लिया है। नीति आयोग भी इस संदर्भ में अपने पक्ष रख चुका है। ऐसे में चुनाव आयोग अागामी 2019 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने की तैयारी कर रहा है। ठीक इससे पहले अभी दिसम्बर में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने  हैं। इस लेख के जरिए हम आपको एक देश एक चुनाव के सभी पक्षों के बारे में बताएंगे । इससे पहले जानते हैं कि इस पर नीति आयोग क्या कहना है।

नीति आयोग के विचार

  1. नीति आयोग ने कहा है कि 2024 से विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएँगे । इसको लेकर फॉर्मूला भी तैयार किया गया है। नीति आयोग ने इस संबंध में  कहा हेै कि फिलहाल पूरे देश में विधानसभा और लोकसभा का चुनाव कराना एक साथ संभव नहीं है। अगर ऐसा किया गया तो कई राज्यों के विधानसभा भंग करने पड़ेंगे जो राजनीतिक दल स्वीकार नहीं करेंगे।
  2. ऐसे में नीति आयोग ने एक फॉर्मूला तैयार किया है और कहा है कि देश में एक साथ चुनाव कराने से आर्थिक खर्चे में कमी आएगी और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार होगा। इसके आगे कहा गया है कि हर साल देश चुनाव में चुनाव का माहौल रहने के बजाय हर 30 महीने बाद चुनाव कराए जाएंगे। जिसमें पहले चरण में लोकसभा के साथ 14 राज्यों ंका चुनाव और 30 महीने बाद यानी लोकसभा का आधा कार्यकाल पूरा होने के बाद बाकी 17 राज्यों में चुनाव कराए जाने की बात कही है।

एक देश एक चुनाव के पक्ष में तर्क- इसके पक्ष में कहा जा रहा है कि चुनाव के खर्च में भारी कमी आएगी और प्रशासानिक व्यवस्था में सुधार होगा। चुनाव के चलते सार्वजनिक जीवन में काफी ज्यादा व्यवधान आता है। एक साथ चुनाव कराने के कारण सार्वजनिक जीवन में कम व्यवधान होंगे। एक के बाद एक होने वाले चुनावों से आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में कठिनाई होती है इससे बचा जा सकेगा। इसके पक्ष में एख और बड़ा तर्क है कि सांसदों और विधायकों में समन्वय बढ़ेगा।

एक देश एक चुनाव के विपक्ष में तर्क- विपक्षी दलों का मानना है कि एक देश एक चुनाव कराने के नाम से संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। विपक्षी पार्टियां यह भी कह रही हैं कि यह वर्तमान केंद्र सरकार की तानाशाही की  नीति है। कई विद्वानों द्वारा कहा जा रहा है कि ऐसा करने के लिए संविधान में संशोधन भी करना पड़ेगा। विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि भारत एक बहु दलों वाली लोकतांत्रिक देश है ऐसे में लोकसभा और विधानसभा के एक साथ कराने से संघीय ढाँचे में दरार पड़ जाएगी। कई अध्ययन कह रहे हैं  कि जब लोकसभा और विधानसभा एक साथ होते हैं तो मतदाता लगभग एक ही पार्टियों को चुनती हैं इसलिए भी इसका जोर शोर से विरोध किया जा रहा है।

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