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भारत पाकिस्तान के बंटवारे में बिछड़े थे भाई-बहन, 75 साल बाद ऐसे मिले, पढ़ें आंसुओं से भीगी कहानी

जब भारत पाकिस्तान का बंटवारा हुआ था, तो उस समय के दौरान ना जाने कितने परिवार टूट गए थे। लोग एक दूसरे से बिछड़ गए थे। लाखों लोगों को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी। लेकिन बंटवारे की त्रासदी झेल चुके कई लोग आज भी जिंदा हैं। भारत पाकिस्तान के बंटवारे के समय एक दूसरे से बिछड़े हुए भाई-बहन के बारे में 75 साल के बाद पता चला है।

दरअसल, कुछ अरसे पहले ही पाकिस्तान की सकीना बीबी “यह मेरी प्रा (बड़े) की तस्वीर है। अगर किसी को पता हो तो मुझे बता देना। मेरी मां ने उसके लिए रोते हुए सारी जिंदगी गुजारी और वह इसी गम में चल भी बसीं।” यह लाइनें कहते हुए उनका चेहरा आंसुओं से भीगा हुआ था। लेकिन रक्षाबंधन से पहले ही उन्हें बड़ी खुशखबरी मिली है। इस बार सकीना की आंखों में खुशी के आंसू हैं।

आपको बता दें कि 67 वर्षीय सकीना बीबी अपने भाई को ढूंढने निकली थीं परंतु अब उनकी यह खोज गुरमेल सिंह ग्रेवाल से मिलने के साथ खत्म हो गई। भारत पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान दोनों भाई एक दूसरे से बिछड़ गए थे। गुरमेल अपने परिवार से अलग गया और भारत में ही रह गया। गुरमेल को भारत के लुधियाना में एक सिख परिवार ने पाला। वहीं सकीना अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चली गई। लुधियाना के जस्सोवाल सूडान गांव के रहने वाले गुरमेल और पाकिस्तान की सकीना जल्द ही एक-दूसरे को कुछ दिनों में ऑनलाइन देख पाएंगे।

पाकिस्तानी यूट्यूबर नासिर ढिल्लो की पहल काम आई

पाकिस्तान के यूट्यूबर नासिर ढिल्लो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लंबे समय से खोए हुए भाई गुरमेल से संबंधित सकीना बीबी की अपील का वीडियो शेयर किया और यह जस्सोवाल गांव के सरपंच जगतार सिंह ने देखा, जिन्होंने पुष्टि की कि सकीना का भाई उनके गांव में रहता है। नासिर ढिल्लो ने टीओआई से फोन पर बात करते हुए कहा कि गुरमेल का जन्म विभाजन से पहले लुधियाना के नूरपुर गांव में हुआ था जबकि सकीना का जन्म 1955 में शेखुपुरा के गुरदास गांव में हुआ था।

परिवार से बिछड़ गए थे गुरमेल सिंह

आपको बता दें कि 1947 में गुरमेल और उनकी मां अपने पैतृक गांव में रह गए थे। उसके पिता ने उन्हें पाकिस्तान भेजने के लिए अधिकारियों को लिखा, उसके बाद उनकी पत्नी को स्थानांतरित कर दिया गया। टीम के पास इंतजार करने का आदेश नहीं था इसलिए 5 साल के गुरमेल कहीं खेलने में व्यस्त था, जिससे वह पीछे छूट गया था। सकीना ने बताया कि बेटे से बिछड़ने के गम में मां की मृत्यु हो गई। उस वक्त सकीना 2 वर्ष की थी। इसके बाद उनके पिता वली मोहम्मद का भी निधन हो गया।

अपनी मृत्यु से पहले सकीना को अपने भाई का 1961 में भेजा गया एक पत्र मिला था, जब उसने अपने पिता से पूछा कि उन्होंने उसे उसके भाई के बारे में क्यों नहीं बताया? तो उन्होंने कहा कि उनकी मां की मृत्यु गुरमेल के बिछड़ने के दर्द से हुई थी और वह बहुत छोटी थी, यह सब समझने के लिए।

लेटर मिला लेकिन जवाब नहीं दे पाए

सकीना बीबी ने वीडियो संदेश में कहा कि उसके माता-पिता ने उसके भाई का पता लगाने की कोशिश की लेकिन असफल रहे। सकीना ने कहा “मुझे अपने भाई के बारे में घर पर कुछ दस्तावेज मिलने के बाद पता चला और फिर अपने पिता से पूछा। जब मेरे भाई ने हमें 1961 में एक तस्वीर के साथ एक पत्र भेजा तो वह आठवीं कक्षा में पढ़ रहा था। उसने पत्र में लिखा कि जिन लोगों ने उसे अपने पास रखा है, उन्होंने उसे अपने बच्चे की तरह पाला है।” पत्र के ऊपर पता नहीं लिखा हुआ था, जिसकी वजह से वह जवाब नहीं दे सके।

भाई से मिलने की प्रार्थना करती थीं

सकीना ने यह कहा कि मेरी मां ने भाई से बिछड़ने का गम में तड़प कर दम तोड़ दिया। मेरे माता-पिता की मृत्यु के बाद मैंने भी अपने भाई की तलाश की और मेरे दामाद ने भी इसमें सहायता की। मैंने हर जगह हमारे पुनर्मिलन के लिए प्रार्थना की, यहां तक कि ननकाना साहिब में भी प्रार्थना की। सकीना के चेहरे पर झुरिया पढ़ चुकी है लेकिन वह यही चाहती हैं कि वह अपने भाई से एक बार मिले लें।

आंखों में आंसू लिए हुए एक संदेश में सकीना ने यह कहा कि “उन्हें यकीन नहीं था कि किसी ने उनके भाई को बताया कि उनकी एक बहन है। मुझे आशा है कि हम किसी दिन मिलेंगे। कौन सी बहन अपने भाई से मिलने की इच्छा नहीं रखेगी। मेरा कोई अन्य रिश्तेदार नहीं है।”

वीडियो देखकर गुरमेल रोने लगे

यूट्यूबर नासिर ढिल्लो ने बताया कि जब उन्होंने वीडियो और कुछ तस्वीरों को अपलोड किया तो उसके बाद जस्सोवाल गांव के सरपंच का उन्हें जवाब मिला था। सरपंच ने कहा कि उन्होंने गुरमेल सिंह को फोन किया और उन्हें अपनी बहन की अपील का वीडियो दिखाया। उसने सोचा कि यह एक वीडियो कॉल है। वीडियो देख कर गुरमेल रोने लगे और बात करने लगे। गुरमेल बोले “मैं तेरा वीरा ही आन।”

सरपंच ने बताया कि एक सिख परिवार ने गुरमेल का पालन-पोषण किया था। वह गांव में ही अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहता है। गुरमेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा कि वह बहुत खुश हैं कि उनकी बहन ने उन्हें ढूंढ निकाला। उन्होंने कहा कि मैं अपने परिवार के सदस्यों को याद करता था लेकिन उन्हें नहीं ढूंढ पाता था।

गुरमेल यह बताते हैं कि उन्होंने यह सुना था कि उनकी मां उनका इंतजार करते हुए इस दुनिया को छोड़ कर चली गई। उन्होंने कहा कि अब मेरी बहन ने मुझे ढूंढ लिया है। मैं कल भी उनसे मिलने जा सकता हूं। लेकिन उन्होंने बताया कि उनके पास पासपोर्ट नहीं है। गुरमेल के पास जैसे ही पासपोर्ट का इंतजाम हो जाएगा, वह अपनी बहन से मिलने जाएंगे। उन्होंने बताया कि वह उसके लिए अपने गांव में बने बिस्किट लेकर जाएंगे। वहीं उनकी पत्नी रघुवीर कौर भी अपनी ननद को पाकर बहुत ज्यादा खुश हैं।

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