सुशांत मामले में आदित्य को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे सीएम पद छोड़कर भाजपा के साथ आने के लिए तैयार थे – दीपक केसरकर

महाराष्ट्र की राजनीति में मची उथल-पुथल के बीच आए दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। इसी बीच एकनाथ शिंदे समूह के प्रवक्ता दीपक केसरकर ने दावा किया है कि सुशांत मामले में बेटे आदित्य को बचाने के लिए उद्धव ठाकरे सीएम पद छोड़कर भाजपा के साथ आने के लिए तैयार थे। दीपक के मुताबिक इस मामले में उद्धव ठाकरे की पीएम मोदी से भी बातचीत चल रही थी। दीपक केसरकर ने शुक्रवार को मुंबई में प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि लेकिन नारायण राणे के केंद्रीय मंत्रिमंडल में जाने के बाद यह मामला अटक गया।

पीएम से कहा था आपके साथ पारिवारिक संबंध जरूरी

प्रेस कांफ्रेंस में दीपक केसरकर ने यह भी बताया कि इस दौरान पीएम मोदी और उद्धव ठाकरे के बीच क्या बातचीत हुई थी। शिंदे गुट के प्रवक्ता के मुताबिक ठाकरे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी।

उन्होंने कहा कि उद्धव ने मुझे इस यात्रा के दौरान हुई चर्चाओं के बारे में जानकारी दी थी। उद्धव ठाकरे ने पीएम मोदी से स्पष्ट कर दिया था कि मैं पद से ज्यादा आपके साथ पारिवारिक संबंध बनाए रखने को तवज्जो देता हूं। दीपक का कहना है कि इस बातचीत के मुताबिक उद्धव ठाकरे को 15 दिनों में अपने पद से हटना था। लेकिन मुंबई लौटने के बाद उद्धव को एहसास हुआ कि यह बातें कार्यकर्ताओं से भी बताई जानी चाहिए, नहीं तो गलत मैसेज जाएगा। इसके बाद उद्धव ठाकरे ने कुछ समय मांगा था।

भाजपा सदस्यों के निलंबंन से भी बढ़ी थी परेशानी

दीपक केसरकर ने यह भी दावा किया कि मोदीजी पार्टी के मुखिया और परिवार के मुखिया के रूप में उद्धव ठाकरे के मन मुताबिक सबकुछ करने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि हम तीनों को यह सब पता था।

इसके अलावा रश्मि ठाकरे को भी यह बात पता थी। लेकिन इसमें काफी समय लग गया और इस बीच विधानसभा सत्र में भाजपा के 12 विधायकों को निलंबित कर दिया गया। इसके बाद भाजपा की तरफ से उद्धव ठाकरे को मैसेज दिया गया था। इसमें कहा गया था कि जब हमारे बीच बातचीत चल रही थी तब भाजपा विधायकों को इतने लंबे समय तक निलंबित करना ठीक नहीं था।

समय की कमी बनी बाधा

एकनाथ शिंदे गुट के प्रवक्ता ने बताया कि इसी बीच नारायण राणे को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। यह बात भी उद्धव ठाकरे को पसंद नहीं आई थी। इसके चलते उद्धव से बातचीत बंद हो गई थी। दो महीने बाद उद्धव ठाकरे से बात की। उस समय उन्होंने कहा था कि छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे को लगा कि बातचीत फिर से शुरू होनी चाहिए और इसमें से कुछ अच्छा निकलना चाहिए। लेकिन दीपक केसरकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे के साथ समय की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पाया।