नैन्सी पेलोसी के ताइवान जाने पर चीन का गुस्सा अभी थमा नहीं, कई देशों के राजदूतों को किया तलब

नैन्सी पेलोसी के ताइवान जाने पर चीन का गुस्सा अभी थमा नहीं है। अमेरिका पर भड़के चीन ने अब यूरोपियन यूनियन के देशों पर भी भड़ास निकाली है। चीन ने यूरोपियन यूनियन में शामिल 7 देशों के राजदूतों को तलब कर विरोध जताया है। इन देशों की ओर से बयान जारी कर कहा गया था कि ताइवान की सीमा पर चीन का सैन्य अभ्यास गलत है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया कि उप मंत्री डेंग ली ने विरोध जताया है और यूरोपीय देशों से कहा कि उनकी ओर से बयान जारी करना हमारे अंदरूनी मामलों में दखल जैसा है। इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अमेरिकी संसद की स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में चीन ने युद्धा अभ्यास शुरू किया है। उसकी ओर से ताइवान की खाड़ी में मिसाइलें दागी गई हैं। बड़े पैमानों पर जहाजों को तैनात किया गया है और वॉर प्लेन भी आसमान में उड़ान भर रहे हैं। ताइवान को चीन अपन हिस्सा मानता रहा है और उसका कहना है कि जरूरत पड़ी तो सैन्य अभियान के जरिए भी वह उसे अपने में मिला सकता है। ताइवान के आसमान के ऊपर से भी कुछ चीनी फाइटर जेट गुजरे हैं। इसके अलावा जहाजों पर सवार चीनी सैनिकों को ताइवान वापस लो के नारे लगाते हुए देखा गया है।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि चीन ने उसके काफी करीब तक सैन्य जहाजों को भेजा है। बफर जोन को पार करने की कोशिश भी चीनी जहाजों की ओर से की गई है। दशकों बाद ताइवान और चीन के बीच इस कदर तनाव देखने को मिला है। यही नहीं चीन की आक्रामकता का असर जापान तक देखने को मिल रहा है। जापान के हातेरुमा स्थित इकनॉमिक जोन में चीनी मिसाइलें जाकर गिरी है। इस पर जापान ने ऐतराज जताया है और कहा कि यह उसकी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। बता दें कि जापान भी उन देशों में से एक है, जिसके ताइवान के साथ अच्छे रिश्ते हैं।

इस बीच चीन को एक बार फिर से नैन्सी पेलोसी की ओर से चुनौती दी गई है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी अमेरिकी ताइवान जाएंगे और चीन चाहे तो उन्हें रोक कर दिखाए। जापान के पीएम फुमियो किशिदा ने मौजूदा हालातों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चीन का आक्रामक सैन्य अभ्यास बड़ी चिंता की बात है और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा है।