राजस्थान के 11 जिलों में फैला लंपी वायरस, 4 हजार गायों की मौत, 50 हजार से ज्यादा गोवंश संक्रमित

लंपी वायरस राजस्थान के 11 जिलों में फैल गया है। प्रदेश में भर में 4 हजार से अधिक गोवंश के मरने का अनुमान है। पश्चिमी राजस्थान के जिले ज्यादा प्रभावित है। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय टीम आज प्रभावित जिलों का दौरा करेगी। जैसलमेर में एक हजार संक्रमित गायों की मौत हो चुकी है। जबकि श्रीगंगानगर, नागौर, हनुमानगढ़, बाड़मेर और जोधपुर में 20 हजार गायों के संक्रमित होने का अनुमान है। श्रीगंगानगर जिले में लंपी वायरस से 500 गायों की मौत हो चुकी है। हालांकि, पशुपालन विभाग के पास मौतों का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन अनुमान है कि राज्य भर में 50 हजार से ज्यादा गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के अधिकारी एक्टिव हो गए है। चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों की केंद्रीय टीम आज राजस्थान के दौरे पर आ रही है। केंद्रीय पशुपालन मंत्री संजीव बाल्यान के निर्देश टीम प्रभावित जिलों का दौरा कर स्थिति का आंकलन करेगी। 30 जुलाई को नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय मंत्री को ट्वीट कर राहत देने का अनुरोध किया था। सांसद हनुमान बेनीवाल ने केंद्रीय मंत्री से पशुधन को बचाने का आग्रह किया था।

राजस्थान के पशुपालन मंत्री लालचंद कटारिया ने लम्पी स्किन डिजीज की स्थिति की समीक्षा की है। कटारिया ने विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर प्रदेश के पश्चिमी जिलों के मवेशियों में फैल रही लम्पी स्किन डिजीज की स्थिति एवं रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित जिलों के कलक्टरों से वार्ता कर स्थिति का जायजा लिया और बीमारी के उपचार एवं रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए। कटारिया ने बताया कि पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर, जालौर, बाड़मेर, सिरोही, जोधपुर, नागौर एवं बीकानेर जिलों में यह संक्रामक रोग गायों में फैल रहा है। उन्होंने डिजीज की रोकथाम एवं उपचार के लिए आवश्यक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये है। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में औषधियां क्रय करने के लिए आवश्यकता अनुसार अतिरिक्त बजट आवंटन करने के निर्देश भी दिये।

शासन सचिव पीसी किशन ने बताया कि प्रभावित प्रत्येक जिले को आपातकालीन जरूरी दवाएं खरीदने के लिए पहले ही एक-एक लाख रुपए और पॉली क्लीनिक को 50-50 हजार रुपए जारी किए गए हैं। ज्यादा प्रभावित जिलों में स्टेट मेडिकल टीम और पड़ोसी जिलों से टीमें भेजी जाएगी। बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे उपायों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर से नोडल अधिकारी भेजे जाएंगे।

प्रदेश में गोवंश संरक्षण के नाम पर प्रदेश सरकार स्टांप औऱ शराब दोनों पर सेस वसूल रही है। वसुंधरा सरकार के समय लगाए गए सेस से 2015 से अब तक 3 हजार करोड़ से ज्यादा का फंड जुटाया गया है। लेकिन इसमें से करीब 2 हजार 137 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए है। जबकि प्रदेश में संक्रामक बीमारी से गायों रोजाना दम तोड़ रही है। गोवंश के लिए सबसे ज्यादा मुखर रहने वाले भाजपा नेताओं ने भी चुप्पी साध रखी है। राजस्थान भाजप के बड़े नेता इस मुद्दे पर न तो कोई बयान दे रहे हैं और न ही सरकार से सवाल पुछ रहे हैं।