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रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर से भिड़ी कांग्रेस-बीजेपी, जानिये क्या कहते हैं आँकड़े?

वर्तमान भाजपा सरकार ने अर्थव्यवस्था में मजबूती और आर्थिक नीतियों को लेकर कई बड़े दावे किए हैं, लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार चाहे खुद की कितनी भी तारीफ कर ले, परंतु देश में रोजगार सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात है। और बेरोजगारी की समस्या देश के सभी सरकारों के लिए सिरदर्द रहा है किसी भी सरकार ने इसका सफल उपाय नहीं दिया है। मोदी सरकार ने 2014 आम चुनाव से पहले वादा किया था कि हर वर्ष 2 करोड़ युवाओं को रोजगार मिलेगा लेकिन आंकड़े ठीक इसके विपरित नजर आ रहे हैं। अांकड़े कह रहे हैं कि भाजपा सरकार के चार सालों बाद कुल दो करोड़ रोजगार के अवसर भी नहीं बने हैं। आर्थिक मामलों में कुछ हद तक सफल रहने के बावजूद सरकार युवाओं को रोजगार देने  में विफल रही है।

पिछले दिनों नितीन गडकरी ने कहा था कि देश में नौकरियां नहीं हैं, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह चुके हैं  कि पिछले एक सालों में एक करोड़ नए रोजगार का सृजन हुआ है। ऐसे में दोनों के बयानों में विराधाभाषी प्रवृत्ति दिख रही है। इन्हीं बयानों को लेकर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है और कहा हेै कि सरकार रोजगार के मुद्दे पर विफल रही है और इसके बावजूद आंकड़ों के  साथ खिलवाड़ करके अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रही है।

क्या कहते हैं अलग अलग आंकड़े- 

  1. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन- अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन अर्थात (आईएलओ) का सर्वे कहता है कि 2014 के बाद भारत में अगले तीन साल तक यानी 2017 तक बेरोजगारी दर लगातार बढ़ी है जो 3.41 से 3.52 तक पहुँच गई है।
  2. सेंटर फॉर मॉनिटरींग इंडियन इकॉनमी- सीएमआईई जो एक निजी संस्था है और भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर रखती है। इस निजी संस्था का मानना है कि भारत में नए वित्तिय वर्ष अप्रैल 2018 में बेरोजगारी की दर बढ़कर 5 फीसदी से ऊपर जा चुकी है। जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक है।
  3. आरबीआई- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपने एक सर्वे में कहा है कि नोटबंदी और जीएसटी जैसे नीतियों ने खासकर असंगठित क्षेत्रों में रोजगार को प्रभावित किया है।
  4. लेबर ब्यूरो- लेबर ब्यूरो के एक सर्वेक्षण के अनुसार अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी रखने वाले संगठित क्षेत्रों में भी बिते वर्षों रोजगार के कम अवसर पैदा हुए हैं। जबकि देश में संगठित क्षेत्र का बड़ा आकार है, जिसमें सोलह लाख नए रोजगार पैदा करने की  आवश्यकता है।

कई बड़े आर्थिक विद्वान मान रहे हैं कि मोदी सरकार का अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर प्रदर्शन ठीक ठाक रहा है लेकिन उपरोक्त आंकड़े बता रहे हैं  कि सरकार रोजगार देने में पूरी तरह से विफल रही है।

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